भारतीय रुपये का वर्ष 2025 में एशिया में सबसे खराब प्रदर्शन
अमेरिकी डॉलर की तुलना में भारतीय रुपया पहली बार 90 की सीमा को तोड़ता हुआ 91 की ओर बढ़ रहा है। भारतीय रुपया इस वर्ष एशिया में सबसे कमजोर प्रदर्शन करने वाली करेंसी साबित हुआ है। वर्ष 2025 में जनवरी से 15 दिसंबर तक इसमें 6 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आ चुकी है।
इस गिरावट ने इस बात पर बहस छेड़ दी है कि क्या कमजोर करेंसी सचमुच निर्यात प्रतिस्पर्धा की क्षमता बढ़ाती है। एक नई रिपोर्ट इस धारणा को तोड़ती है और बताती है कि कैसे कई बार इसका नुकसान भी होता है। प्रमुख एशियाई देशों, जिनके साथ निर्यात में भारत को प्रतिस्पर्धा करनी पड़ती है, की करेंसी पर नजर डालें तो डॉलर की तुलना में भारतीय रुपया, वियतनाम के डोंग और इंडोनेशिया के रुपिया में इस साल गिरावट दर्ज की गई है। दक्षिण कोरिया का वॉन तो लगभग स्थिर रहा है, लेकिन चीन के युआन, सिंगापुर के डॉलर, थाईलैंड के बहत और मलेशिया के रिंगिट की वैल्यू में मजबूती आई है। रुपये की मदद करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) समय-समय पर डॉलर की बिक्री करता रहता है। वित्त वर्ष 2023-24 में उसने 41.27 अरब डॉलर की शुद्ध खरीद की थी, लेकिन 2024-25 में 34.51 अरब डॉलर की शुद्ध बिक्री की।
मौजूदा वित्त वर्ष, 2025-26 में भी उसने मई को छोड़कर बाकी हर महीने डॉलर की शुद्ध बिक्री की है। आरबीआई ने अप्रैल में 1.66 अरब डॉलर की विदेशी मुद्रा की शुद्ध बिक्री की जबकि मई में 1.76 अरब डॉलर की शुद्ध खरीद की। उसके बाद जून में 3.66 अरब डॉलर, जुलाई में 2.54 अरब डॉलर, अगस्त में 7.69 अरब डॉलर और सितंबर में 7.91 अरब डॉलर की शुद्ध बिक्री की है। इस तरह 2024-25 में सितंबर तक आरबीआई 21.70 अरब डॉलर की विदेशी मुद्रा की शुद्ध बिक्री कर चुका है।
पिछली मौद्रिक नीति समीक्षा में आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा, हमने डॉलर की तुलना में रुपये का कोई स्तर तय नहीं किया है। डॉलर की मांग के कारण रुपये की वैल्यू में गिरावट आ रही है। उनसे पहले सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन ने भी कहा था कि रुपये में मौजूदा गिरावट को लेकर वे चिंतित नहीं हैं।
रिजर्व बैंक की तरफ से उपलब्ध नवीनतम जानकारी के अनुसार 5 दिसंबर 2025 को उसके पास 687.26 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार था, जो 11 महीने के आयात के लिए पर्याप्त है। एक साल पहले, 1 नवंबर 2024 को यह 682.13 अरब डॉलर था। इस बीच 27 जून, 12 सितंबर और 17 अक्टूबर 2025 को फॉरेक्स भंडार 700 अरब डॉलर के पार चला गया था। 12 सितंबर को विदेशी मुद्रा भंडार 702.96 अरब डॉलर तक पहुंच गया था।