लोकसभा में राहुल के भाषण पर लगातार दूसरे दिन विवाद, नेता प्रतिपक्ष का आरोप सरकार के इशारे पर बोलने से रोका
लोकसभा में राहुल गांधी की स्पीच पर लगातार दूसरे दिन हंगामा हुआ। राहुल ने मंगलवार दोपहर 2 बजे पूर्व आर्मी चीफ की अनपब्लिश्ड बुक के आर्टिकल को सदन में पेश किया। कहा- मुझे बोलने दिया जाए। उनके यह कहते ही एनडीए के सांसदों ने टोकना शुरू कर दिया।
आज वे 14 मिनट तक बोलने की कोशिश करते रहे। इस बीच हंगामा तेज होता गया। राहुल ने सोमवार को भी 46 मिनट तक अपनी बात कहने की कोशिश की थी। आज हंगामा बढ़ने पर स्पीकर कृष्णा प्रसाद तेन्नेटी ने राहुल को रोका और दूसरी पार्टियों के सांसदों को बोलने को कहा, लेकिन राहुल के समर्थन में सपा सांसद नरेश उत्तम पटेल, TMC सांसद शताब्दी रॉय और DMK सांसद डी एम कातिर आनंद ने बोलने से इनकार कर दिया। विपक्षी सांसद नारेबाजी करते वेल में पहुंच गए। स्पीकर पीठासीन कृष्णा प्रसाद तेन्नेटी की चेयर की तरफ विपक्षी सांसदों ने पेपर उछाले। इसके बाद कार्यवाही स्थगित कर दी गई।
इसके बाद पीठासीन दिलीप सैकिया ने 8 सांसदों को पूरे सत्र के लिए निलंबित कर दिया। कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिखा है। पत्र में उन्होंने स्पष्ट किया है कि राष्ट्रपति के अभिभाषण पर बोलने से उन्हें रोकना लोकतंत्र के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है और राष्ट्रीय सुरक्षा पर चर्चा को रोकने का प्रयास है। राहुल गांधी ने अपने पत्र में लिखा 'कल जब मैं राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान बोल रहा था, तो आपने मुझे उस पत्रिका की प्रमाणिकता सत्यापित करने को कहा, जिसका मैं हवाला देना चाहता था। मैंने आज अपने भाषण की शुरुआत में दस्तावेज को प्रमाणित कर दिया।
परंपरा के अनुसार, एक सदस्य जो किसी दस्तावेज का हवाला देना चाहता है, उसे उसका प्रमाणिकरण करना होता है। इस प्रक्रिया के पूरा होने के बाद स्पीकर सदस्य को दस्तावेज का हवाला देने की अनुमति देते हैं। इसके बाद इसका जवाब सरकार की जिम्मेदारी होती है और अध्यक्ष का कर्तव्य समाप्त हो जाता है।' उन्होंने आगे कहा मुझे लोकसभा में बोलने से रोकना केवल इस परंपरा का उल्लंघन नहीं है, बल्कि यह गंभीर चिंता का विषय है कि विपक्ष के नेता के रूप में मुझे राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण मामलों पर बोलने से रोकने का जानबूझकर प्रयास किया गया।
राष्ट्रपति के अभिभाषण में राष्ट्रीय सुरक्षा एक मुख्य विषय था, जिस पर संसद में चर्चा होना आवश्यक है। राहुल गांधी ने स्पीकर को याद दिलाया कि संसद में सभी सदस्यों के अधिकारों की रक्षा करना उनकी संवैधानिक और संसदीय जिम्मेदारी है। उन्होंने लिखा कि विपक्ष के नेता और हर सदस्य को बोलने का अधिकार लोकतंत्र का अभिन्न हिस्सा है। पत्र में राहुल गांधी ने कहा कि इस तरह के अधिकारों से वंचित किए जाने की वजह से संसदीय इतिहास में पहली बार ऐसी स्थिति उत्पन्न हुई, जब सरकार के कहने पर स्पीकर ने विपक्ष के नेता को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर बोलने से रोका। उन्होंने इसे लोकतंत्र पर कलंक बताते हुए कड़ा विरोध दर्ज कराया। इससे पहले विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा 'राष्ट्रपति के भाषण में एक बहुत ही महत्वपूर्ण मुद्दा राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित है।
पाकिस्तानियों, चीनियों और हमारे बीच के संबंध। इस लेख में एक बहुत ही महत्वपूर्ण बिंदु है जिसकी मैंने पुष्टि की है। यह प्रधानमंत्री की प्रतिक्रिया के बारे में बात करता है... हमारे राष्ट्रपति का भाषण उस मार्ग के बारे में था जिस पर भारत को आज चलना है। विश्व मंच पर, अंतरराष्ट्रीय मामलों का मुख्य मुद्दा चीन और अमेरिका के बीच संघर्ष है। यह हमारे राष्ट्रपति के भाषण का केंद्र बिंदु है। मैं बस इतना कह रहा हूं कि मुझे चीन और भारत के बीच जो हुआ और हमारे प्रधानमंत्री ने उस पर क्या प्रतिक्रिया दी, उस पर एक बयान देने दीजिए। मुझे क्यों रोका जा रहा है?'