डी पी यादव ने भरी हुंकार, अलग हो "पश्चिम प्रदेश"
उत्तर प्रदेश सरकार के पूर्व मंत्री और पूर्व राज्यसभा सांसद डीपी यादव ने पश्चिम प्रदेश निर्माण मोर्चा के गठन और आंदोलन के संदर्भ मे दिल्ली मे एक प्रेसवार्ता की।
उत्तर प्रदेश के विशाल भूभाग, जटिल प्रशासनिक संरचना और न्यायिक चुनौतियों से जूझते उत्तर प्रदेश को छोटे-छोटे राज्यों में बाँटने की आवश्यकता पर जोर देते हुए डी पी यादव ने कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों को एक अलग पश्चिम प्रदेश के रूप में विकसित करने का समय आ गया है।उत्तर प्रदेश दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा राज्य है, जहाँ 24 करोड़ से अधिक आबादी निवास करती है। इसकी वजह से प्रशासनिक अक्षमताएँ, विकास में असमानता और न्यायिक देरी आम हो गई हैं। पश्चिमी क्षेत्र—मेरठ, सहारनपुर, मुरादाबाद, बरेली, आगरा, अलीगढ़ आदि डिवीजनों को मिलाकर बनने वाले पश्चिम प्रदेश से स्थानीय मुद्दों का त्वरित समाधान संभव होगा।
श्री यादव ने कहा, "पश्चिमी यूपी के लोग दशकों से उपेक्षित हैं। अलग राज्य बनने से कृषि, उद्योग, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में क्रांति आएगी।"मोर्चा का आंदोलन शांतिपूर्ण लेकिन दृढ़ होगा। इसमें जनसभाएँ, धरना-प्रदर्शन, हस्ताक्षर अभियान और दिल्ली में राज्य निर्माण का बिल पेश करने की मांग शामिल होगी। पूर्व सांसद ने केंद्र और राज्य सरकार से अपील की कि वे इस मांग को गंभीरता से लें, जैसा कि तेलंगाना और उत्तराखंड जैसे राज्यों के निर्माण में हुआ। उन्होंने आगे कहा कि... विशाल भौगोलिक क्षेत्र के कारण प्रशासनिक निर्णयों में देरी होती है... अदालतों पर अत्यधिक बोझ के चलते न्याय मिलने में वर्षों लग जाते हैं... पश्चिमी उत्तर प्रदेश आर्थिक रूप से सशक्त होने के बावजूद नीतिगत प्राथमिकताओं से वंचित है।
डीपी यादव के अनुसार, अलग पश्चिम प्रदेश के गठन से... प्रशासन जनता के अधिक नजदीक होगा... कानून-व्यवस्था और न्यायिक प्रक्रिया में तेजी और पारदर्शिता आएगी... क्षेत्रीय विकास को नई गति मिलेगी... युवाओं को रोजगार और अवसर सृजित होंगे... उन्होंने स्पष्ट किया कि पश्चिम प्रदेश निर्माण मोर्चा का आंदोलन पूरी तरह लोकतांत्रिक, शांतिपूर्ण और संविधान के दायरे में रहेगा।
मोर्चा जनसभाओं, संवाद कार्यक्रमों, ज्ञापन और लोकतांत्रिक तरीकों से केंद्र व राज्य सरकार तक अपनी मांग पहुंचाएगा। डीपी यादव ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसानों, युवाओं, अधिवक्ताओं, व्यापारियों और सामाजिक संगठनों से इस आंदोलन से जुड़ने की अपील करते हुए कहा कि यह लड़ाई किसी दल या व्यक्ति की नहीं, बल्कि पश्चिम प्रदेश के भविष्य और अधिकारों की है।