तुर्कमान गेट के बाद अब जामा मस्जिद के पास चलेगा बुलडोजर?
दिल्ली हाईकोर्ट ने नगर निगम को सख्त निर्देश दिए हैं कि वह अगले दो महीनों के भीतर ऐतिहासिक जामा मस्जिद के आसपास के पूरे इलाके का व्यापक सर्वे करे. यदि इस सर्वे में कोई भी अवैध निर्माण या सार्वजनिक भूमि पर अतिक्रमण पाया जाता है, तो कानून के अनुसार उसे तुरंत हटाया जाए।
यह आदेश पुरानी दिल्ली के एक स्थानीय निवासी फरहत हसन द्वारा दायर याचिका पर नवंबर में दिया गया था. याचिका में आरोप लगाया गया कि जामा मस्जिद के गेट नंबर तीन, पांच और सात के बाहर अवैध रूप से पार्किंग और व्यावसायिक गतिविधियां चल रही हैं. इससे न केवल आम जनता को परेशानी हो रही है, बल्कि इस ऐतिहासिक धरोहर की सांस्कृतिक विरासत को भी गंभीर नुकसान पहुंच रहा है।

याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट में जामा मस्जिद की गरिमा को लेकर गहरी चिंता जताई है. उन्होंने बताया कि मस्जिद के प्रमुख द्वारों के पास अवैध पार्किंग का जाल फैला हुआ है. गेट नंबर 3, 5 और 7 के ठीक बाहर गाड़ियों की भीड़ लगी रहती है. इससे नमाजियों और पर्यटकों को मस्जिद के अंदर जाने में भारी दिक्कत होती है. सार्वजनिक रास्तों पर फेरी वालों और अवैध दुकानों ने कब्जा कर रखा है. कोर्ट ने कहा है कि सार्वजनिक जमीन का व्यावसायिक दोहन किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. अब एमसीडी को इन सभी जगहों का बारीकी से निरीक्षण करना होगा. यदि वहां कोई गड़बड़ी मिली, तो कानून अपना काम करेगा और बुलडोजर एक्शन भी हो सकता है।
जामा मस्जिद केवल एक धार्मिक स्थल नहीं है. यह देश की एक बड़ी सांस्कृतिक विरासत भी है. याचिका में आरोप लगाया गया है कि अवैध अतिक्रमण की वजह से इस ऐतिहासिक इमारत की खूबसूरती पर बुरा असर पड़ रहा है. हर रोज हजारों की संख्या में विदेशी पर्यटक और श्रद्धालु यहां आते हैं. लेकिन चारों तरफ फैली गंदगी और भीड़ की वजह से उन्हें जाम का सामना करना पड़ता है. कोर्ट ने एमसीडी पार्कों और अन्य सार्वजनिक स्थानों के विस्तृत सर्वे का आदेश दिया है. इस सर्वे का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि कहां-कहां नियमों का उल्लंघन हुआ है. ऐतिहासिक धरोहरों के पास ऐसी गतिविधियां पूरी तरह गैर-कानूनी हैं।
मुगल बादशाह शाहजहां द्वारा बनवाई गई जामा मस्जिद भारत की सबसे बड़ी मस्जिदों में से एक है. इसे 1656 में पूरा किया गया था. इसकी वास्तुकला में लाल बलुआ पत्थर और सफेद संगमरमर का शानदार उपयोग किया गया है. ऐतिहासिक धरोहरों के 100 मीटर के दायरे में किसी भी तरह का स्थायी निर्माण या व्यावसायिक गतिविधि प्रतिबंधित होती है।
हाईकोर्ट ने एमसीडी को सर्वे रिपोर्ट जमा करने के लिए केवल दो महीने का समय दिया है. यह समय सीमा प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती है. पुरानी दिल्ली का यह इलाका बहुत ही व्यस्त और संकीर्ण गलियों वाला है. सर्वे के दौरान टीम को स्थानीय विरोध का सामना भी करना पड़ सकता है. लेकिन कोर्ट ने साफ कर दिया है कि अगर कोई अवैध कब्जा पाया जाता है, तो उसे बिना देरी के हटाया जाए. हाईकोर्ट के इस आदेश से ट्रैफिक जाम की समस्या दूर होने की उम्मीद है. लोगों को पैदल चलने के लिए अब साफ रास्ते मिल सकेंगे. अब सबकी निगाहें एमसीडी की रिपोर्ट और उसके बाद होने वाली कार्रवाई पर टिकी हैं।