बालासिनोर में बायो-हैज़र्ड वेस्ट साइट को लेकर ग्रामीणों में रोष, स्वास्थ्य और खेती पर कांग्रेस जताई चिंता
बालासिनोर, गुजरात। बालासिनोर क्षेत्र में स्थापित बायो-हैज़र्ड वेस्ट डंपिंग साइट को लेकर ग्रामीणों में भारी रोष व्याप्त है। इस मुद्दे पर प्रेस से बातचीत करते हुए गुजरात प्रदेश कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अमित चावड़ा ने कहा कि सरकार द्वारा बिना पर्याप्त जनसुनवाई और स्थानीय सहमति के बायो-हैज़र्ड वेस्ट डंपिंग साइट स्थापित करना अत्यंत चिंताजनक है। इससे क्षेत्र के लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ने की आशंका है, वहीं किसानों की खेती और आजीविका भी खतरे में पड़ सकती है।
कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अमित चावड़ा ने बताया कि बायो-हैज़र्ड वेस्ट में अस्पतालों, प्रयोगशालाओं और औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाला खतरनाक कचरा शामिल होता है, जिसमें जहरीले रसायन और संक्रमण फैलाने वाले तत्व मौजूद रहते हैं। यदि इसका सही ढंग से निपटान नहीं किया गया, तो यह जमीन, जल और हवा को प्रदूषित कर सकता है। उन्होंने आशंका जताई कि इससे कैंसर, त्वचा रोग, सांस संबंधी बीमारियों और अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है।

ग्रामीणों का कहना है कि डंपिंग साइट के आसपास की कृषि भूमि पहले ही प्रभावित होने लगी है। खेतों की मिट्टी की उर्वरता कम होने, फसलों की गुणवत्ता गिरने और भूजल के दूषित होने की आशंका को लेकर किसान बेहद चिंतित हैं। कई किसानों ने आरोप लगाया कि यदि यह स्थिति बनी रही, तो आने वाले समय में उनकी फसलें पूरी तरह बर्बाद हो सकती हैं। स्थानीय ग्रामीणों ने यह भी कहा कि सरकार ने इस परियोजना को लागू करने से पहले न तो पर्यावरणीय प्रभाव का सही आकलन किया और न ही ग्राम सभाओं से राय ली। उनका आरोप है कि प्रशासन आम जनता की जान-माल की सुरक्षा की बजाय केवल औपचारिकताओं में उलझा हुआ है।
इस मौके पर ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की कि बायो-हैज़र्ड वेस्ट साइट को तत्काल हटाया जाए या किसी निर्जन और वैज्ञानिक दृष्टि से सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित किया जाए। साथ ही, प्रभावित क्षेत्र में स्वास्थ्य जांच शिविर लगाने, जल और मिट्टी की गुणवत्ता की नियमित जांच कराने तथा किसानों को संभावित नुकसान के लिए मुआवजा देने की भी मांग उठाई गई।
अमित चावड़ा ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द ही इस मुद्दे पर गंभीरता नहीं दिखाई, तो ग्रामीण शांतिपूर्ण आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई केवल बालासिनोर की नहीं, बल्कि पर्यावरण और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित रखने की है।